बाढ़ पीडितों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ग्लेशियर लेडी शान्ति ठाकुर ने लिखा पत्र
रेन्द्र नेगी
उत्तरकाशी
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग्लेशियर शान्ति ठाकुर ने लिखा पत्र ।
उत्तरकाशी - खबर उत्तरकाशी के बड़कोट से जहां पिछले 17 अगस्त को आराकोट क्षेत्र में 18 आई दैवीय आपदा से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक स्तर से हो रही लापरवाही के विरुद्ध में ग्लेशियर लेडी शांती ठाकुर ने आज यहां बड़कोट में प्रेस कांफ्रेंस की ।
शान्ति ठाकुर ने प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक पत्र भी जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मैं मांग करती हूं कि हमारे इस दुख की घड़ी में आपके अलावा इस मुसीबत से दूसरा कोई नहीं उबार सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र की जीवन शैली खत्म हो चुकी है। आज तक यह क्षेत्र देश के कोनों तक अपने बागवानों से अपने सेबों की फसल को पहुंचाते थे, लेकिन आज हम इस स्थिति में पहुंच चुके हैं कि हमारे जीवन जीने के सारे सहारे खत्म हो चुके हैं। आप से इस क्षेत्र की जनमानस को दोबारा से जनजीवन और आय का संसाधन सुचारू करने की मांग करते हैं।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के पढ़े-लिखे युवकों एवं युवतियों को हर घर से एक व्यक्ति को नौकरी दिलाने की बात कही ।
उनका यह भी कहना है कि भारत सरकार की टीम द्वारा 38 करोड़ आंकलन किया गया है जबकि नुकसान इससे भी बहुत ऊपर जा चुका है
सरकार के मानक की ओर से जमीन क्षतिग्रस्त के 6000 हेक्टेयर आंकी जाती है जबकी किसान भूमिहीन और भवन हीन हो चुके हैं अगर यह मानक सरकार द्वारा तय किया जाना है तो इससे अच्छा यह होगा कि बाढ़ग्रस्त लोगों को कोटधार से चिवा तक लोगों को विस्थापित किया जाए क्योंकि क्षतिग्रस्त हुई जमीन बिल्कुल समाप्त हो चुकी है जिस को दोबारा से हरा-भरा नहीं किया जा सकता
शान्ति ठाकुर का कहना है कि टीकोची में इंटर कॉलेज की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो चुकी है जिसके कारण 300 बच्चों का भविष्य अंधेरे में आ गया है जिसके लिए प्रदेश सरकार को आदेश करने कि बात कही गई है पत्र में आरकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी जिक्र किया गया है जो भीषण आपदा की भेंट गया था
शान्ति ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में जिन जिन किसानों ने केसीसी कर्ज ले रखा है उसको चुकाने के लिए किसान के पास जब जमीन ही नहीं रही तो कर्ज कैसे चुका पायेंगे इस कर्ज को किसानों के ऊपर से माफ़ करने की बात भी इस पत्र में ज़िक्र किया गया है ।
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